

17 जून 2016 को मोदी सरकार द्वारा विधि आयोग से समान नागरिक संहिता पर राय मांगा गया। इस पहल के अनुक्रम में डां बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में विधि आयोग द्वारा समान नागरिक संहिता पर रिपोर्ट देने के बजाय धर्म आधारित अलग-अलग परिवारिक कानूनों में सुधार के लिए एक परामर्श पत्र दिनांक 31 अगस्त, 2018 प्रस्तुत किया गया।
विधि आयोग का यह परामर्श पत्र 5 अध्याय और 182 पृष्ठ में तैयार किया गया है। इसके पहले अध्याय - 'परिचय' में आयोग द्वारा निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान परिदृश्य में देश के लिए समान नागरिक संहिता का निर्माण करना न तो आवश्यक है और ना ही वांछनीय।
उपर्युक्त निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए विधि आयोग द्वारा उन सभी बातों को एकत्रित करने का प्रयास किया गया है, जो समान नागरिक संहिता के खिलाफ हो सकते हैं। और आश्चर्यजनक रूप से डॉ चौहान आयोग न केवल शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर बल्कि संविधान सभा के अस्तित्व की वैधता पर अनावश्यक और अनुचित टिप्पणी करने तक चला गया।
विधि आयोग द्वारा समान नागरिक संहिता के खिलाफ दिये गये नकारात्मक बातों की वास्तविकता को यदि हम समझ ले और इनका निराकरण निकाल लें, तो समान नागरिक संहिता के लिए रास्ता और आसान हो जाएगा। इस दृष्टिकोण से विधि आयोग के परामर्श पत्र में दिए गए तर्कों एवं निकाले गए निष्कर्षों का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना आवश्यक है। इस शोध पुस्तक के माध्यम से ऐसा करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक के अध्याय-
1. सर्वसहमति पर संस्थागत शुचिता के खिलाफ निष्कर्ष;
2. संविधान-सभा के अस्तित्व को असंयमित चुनौती;
3. नीति-निदेशक सिद्धान्त के बारे में गलतफहमी;
4. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अनुचित टिप्पणी;
5. धार्मिक आजादी और समानता के अधिकार को लेकर ठहराव;
6. समुदाय के अन्दर समानता को लेकर अनावश्यक अभ्यास;
7. व्यक्तिगत कानून की स्थिति को लेकर सन्देह;
8. मुस्लिम कानून के संहिताकरण को लेकर दुविधा;
9. हिंदू अविभाजित परिवार पर अनुचित हमला;
10. संविधान की छठी अनुसूची पर गैरजिम्मेदाराना कार्य।
पुस्तक के परिशिष्ट-
परिशिष्ट 1 -
(क) समान नागरिक संहिता के बारे में संविधान निर्माताओं के विचार;
(ख) समान नागरिक संहिता के बारे में सुप्रीम कोर्ट के विचार;
(ग) समान नागरिक संहिता के बारे में विद्वानों के विचार;
परिशिष्ट 2 - समान नागरिक संहिता बनने से होने वाले प्रमुख सुधार एवं लाभ;
परिशिष्ट 3 - समान नागरिक संहिता निर्माण का ब्लूप्रिंट।
परिशिष्ट 4 - 'मिशन आर्टिकल 44 : एक राष्ट्र, एक सिविल कानून' द्वारा किये जा रहे प्रयास।